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JANKRITI ISSUE 71

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JANKRITI के इस अंक में आप साहित्य, कला, पत्रकारिता, इतिहास इत्यादि क्षेत्रों के महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित शोध आलेख, लेख पढ़ सकते हैं।

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Description

कला-विमर्श
1. आदिवासी अस्मिता के सवाल और हिन्दी रंगमंच: डॉ. अनिल शर्मा 10-18
2. प्रारम्भिक भोजपुरी सिनेमा में गीत-संगीत और उसका वैशिष्ट्य: डॉ. संगीता राय 19-36
3. लोकगीतों के फकीर बादशाह : देवेंद्र सत्यार्थी- बी आकाश राव 37-50
  दलित एवं आदिवासी -विमर्श
4. समकालीन दलित महिला काव्य में स्त्री का प्रतिरोध: उषा यादव 51-57
5. हिंदी कविता में आदिवासी प्रतिरोध: विकल सिंह 58-65
  भाषिक-विमर्श
6. दक्खिनी भाषा, साहित्य और इतिहास का पुनःपाठ: राजकुमार 66-74
  मीडिया-विमर्श
7. दूसरे दौर की पत्रकारिता और समसामयिक समीकरण: डॉ. सरोज कुमारी 75-80
  शिक्षा-विमर्श
8. GANDHIAN EDUCATION AND ITS RELEVANCE FOR SUSTAINABLE RURAL DEVELOPMENT IN INDIA: Rajni Kant Dixt 81-90
  स्त्री- विमर्श
9. प्रतिरोधी समाजव्यवस्था एवं इक्कीसवीं सदी की हिंदी स्त्री आत्मकथाएँ: सुप्रिया प्रभाकर जोशी 91-97
10. स्त्री चेतना में महादेवी वर्मा के  स्वर: डॉ. शमा खान 98-102
11. ‘वर्तमान समय में नारी की बदलती दशा व दिशा’

(‘पंचकन्या’ उपन्यास के विशेष संदर्भ में): वंदना पाण्डेय

103-108
  साहित्यिक-विमर्श
12. 21 वीं सदी में हिन्दी भाषा का सवाल- एक वाजिब सवाल

(हिन्दी उपन्यासों के विशेष संदर्भ में): डॉ. मंजू कुमारी

109-136
13. मुक्तिबोध की पहचान का संघर्ष: अभी अलिखित पुस्तक हूँ! – रमेश कुमार राज 137-146
14. निर्मल वर्मा के उपन्यासों में मूल्य-विघटन से प्रभावित बाल-जीवन: डॉ. सोमाभाई जी. पटेल 147-151
15. स्कन्दगुप्तः राष्ट्रीय चेतना का जीवन्त दस्तावेज: ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह 152-162
16. संत कबीर के काव्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन: गौरव वर्मा 163-170
17. राकेश कबीर की कविताओं में पर्यावरण चिंतन: लक्ष्मी डागर 171-176
18. मीरा के काव्य में स्त्री मुक्ति के स्वर: कुमकुम पाण्डेय 177-182
19. नागार्जुन: कविता की अदालत में खड़ा जनता का वकील: बिमलेंदु तीर्थंकर 183-189
20. जहां कोई वापसी नहीं :विकास या विस्थापन- डॉ. बीना जैन 190-199
21. एक कथाकार के रूप में कुँवर नारायण: डॉ. अमरनाथ प्रजापति 200-210
22. आदिवासी स्त्री के अंतर्मन और बाह्य जीवन की बेबाक अभिव्यक्ति:

डॉ. गंगाधर चाटे

211-217
23. अशोक वाजपेयी का मृत्यु चिंतन: संतोष कुमार 218-232
24. अंधविश्वास को मिटाने वाले प्रकाश पुंजः  संत गुरू घासीदास- मनीष कुमार कुर्रे 233-243
25. प्रेमचंद के आलोचक और आलोचकों के प्रेमचंद: सुशील द्विवेदी 244-250
           राजनीतिक- विमर्श
26. लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी: लोकबंधु राजनारायण- निशा राय 251-256
27.           गांधी आश्रम : अवधारणा, कार्य एवं प्रभाव- प्रिंस कुमार सिंह 257-261
           पुस्तक समीक्षा
28. समीक्ष्य पुस्तक – मैं कैसे हॅंसू (कहानी संग्रह)

समीक्षा आलेख – कठिन समय का दस्तावेज – मैं कैसे हॅंसू: सुषमा मुनीन्द्र

262-265

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