Tag Archives: आत्मकथा

black and white abstract painting

दलित लोकजीवन का सौंदर्य प्रतीक ‘मुर्दहिया’

February 27th, 2021

दलित साहित्य का आरंभ ही दलित आत्मकथाओं से हुआ है। तुलसीराम ने ‘मुर्दहिया’ में अपने वैयक्तिक जीवन की पीड़ा, दुख, दर्द के साथ-साथ लोकजीवन में व्याप्त अंधश्रद्धा, अपशकुन, देवी देवता, भूत-प्रेत का जीवंत वर्णन किया है। दलित लोकजीवन का सौंदर्य ‘मुर्दहिया’ में साकार हो उठा है। इसलिए दलित आत्मकथाओं में तुलसीराम कृत ‘मुर्दहिया’ विशिष्ट स्थान रखती है।

C:\Users\Hp\Desktop\sketch\pexels-photo-948620.jpeg

स्त्री द्वारा लिखे गए 2000 से अब तक प्रकाशित संस्मरण-प्राची तिवारी

January 24th, 2021

संस्मरणों पर अभी तक काफी कम काम हुआ है। महिला लेखिकाओं के संस्मरणों को लेकर सुव्यवस्थिति एवं विविध आयामों को लेकर किये गये कार्य की कमी है। अत: इस शोध में उनके संस्मरणों के विविध पक्षों को उद्घाटित करने की योजना है।

दलित महिला रचनाकारों की आत्मकथाओं में अभिव्यंजित व्यथा- विजयश्री सातपालकर

October 6th, 2020

महिला आत्मकथाकारों में कौशल्या बैसंत्री की ‘दोहरा अभिशाप’ एवं सुशीला टाकभौरे की ‘शिकंजे का दर्द’ उल्लेखनीय है। पुरुष लेखक की तुलना में दलित लेखिकाओं की आत्मकथाएं उतनी मात्र में उपलब्ध नहीं है। भारतीय वर्ण व्यवस्था के तले दलित स्त्रियाँ ने मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा की दोहरी मार सही है। प्रस्तुत लेख में कौशल्या बैसंत्री कृत ‘दोहरा अभिशाप’ और सुशीला टाकभौरे कृत ‘शिकंजे का दर्द’ आत्मकथाओं में अभिव्यक्त व्यथा का चित्रण किया गया है।