Tag Archives: कविता

विद्रोही कलम

May 5th, 2022

विद्रोही कलम क्यों जी कलम अभी सोई हुई हो, उठो, अभी तुम्हें कोशों दूर चलना है, खुद में सब संताप भिचकर, विद्रोह के स्वर लिखना है ।।१।। क्यों जी कलम अभी सोई हुई हो, उठो, अभी तुम्हें इस समाज के युवाओं का, नया भविष्य लिखना है । नभ के तारों के समान, टिमटिमाते इन युवाओं […]

युद्ध की कविताएं

March 24th, 2022

   १. युद्ध के बीज उपहार में मिलते हैं, छोटी लड़कियों को गुड़ियाएं, और नन्हे लड़को को बंदूक के खिलौने, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में नन्ही बच्चियां सजती है परियां बन, और नन्हे बच्चे फाैजी पोशाक में, और दुनिया युद्ध के कारणों को जानने के लिए विमर्श में मसरूफ है….       २.  युद्ध में […]

क़िला

March 20th, 2022

!! क़िला !! हर क़िले की अपनी कहानी होती है ! एक राजा होता है एक रानी होती है ! क़िले का भूगोल बिगड़ जाये समय के संग-संग भले ही पर हर क़िले का अपना इतिहास होता है ! पढ़ लेते हैं वे जो जानते हैं पढ़ना समय की अनगिनत इबारतें क़िले की बनने-बिगड़ने की […]

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रचनाएँ – ओमप्रकाश मुंडा

January 24th, 2021

बेटी के कानों से दूर जिन दिनों लोग मेरी प्रेमिकाओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे सवाल दर सवाल मेरी जिजीविषा कुंठित हो बन रही थी खोपड़ी पर नैतिकता का पहाड़ प्रेम की तो प्रेरणा मात्र है मनुष्य की देह ! कबीलाई सभ्यता में माँ और बेटे का जैविक संबंध विकास की प्रगतिशील परिभाषा […]

कविता

September 21st, 2020