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लोक जीवन की पहचान दिखाती नव – वामपंथी कविता : राजेश जोशी की जुबानी: षैजू के

October 6th, 2020

राजेश जोशी स्वभाव से बड़े शरीफ किस्म के आदमी है। लेकिन कविता के माध्यम से वह आज के बाजारीकरण के युग में ऐसी व्यंग्य बात कह देते हैं कि समाज की खोखली व्यवस्था का पर्दाफाश हो जाता है। आज का समय भूमंडलीकरण, उपयोगितावादी और विज्ञापन का युग है, जिसमें मानव जीवन के मूलभूत गुणों का हनन हो रहा है। चाहे वह आपसी सदभावना हो, प्रेम हो, अपनापन हो, रिश्ते – नाते हो, समाज या परिवार हो।