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black and white abstract painting

दलित लोकजीवन का सौंदर्य प्रतीक ‘मुर्दहिया’

February 27th, 2021

दलित साहित्य का आरंभ ही दलित आत्मकथाओं से हुआ है। तुलसीराम ने ‘मुर्दहिया’ में अपने वैयक्तिक जीवन की पीड़ा, दुख, दर्द के साथ-साथ लोकजीवन में व्याप्त अंधश्रद्धा, अपशकुन, देवी देवता, भूत-प्रेत का जीवंत वर्णन किया है। दलित लोकजीवन का सौंदर्य ‘मुर्दहिया’ में साकार हो उठा है। इसलिए दलित आत्मकथाओं में तुलसीराम कृत ‘मुर्दहिया’ विशिष्ट स्थान रखती है।