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बूढ़ा बरगद का पेंड़ बोला (मार्मिक कविता)

March 21st, 2022

मेरी ही टहनियों को काटकर छाँव की तलाश में भटक रहे लोग कराहते हुए कहीं यहीं पर जैसे बूढा बरगद का पेड़ बोला कुछ याद है “किशन” की सभ भूल गए? अपने दादाजी की अंगुलियाँ थामे मुझसे मिलने तुम भी आते वो मुझसे और तुम चिड़ियों से बतियाते मेरी डाल पे बैठे वो चिड़ियों की […]

Jindagi

March 19th, 2022

जिंदगी से इक दिन मिली जिंदगी जिंदगी हो गई इक हसीं जिंदगी जिंदगी ने कहा जिंदगी तुम सुनो जिंदगी के बिना ना रही जिंदगी   जिंदगी जब मिली जिंदगी से तो पूछा अब तक कहां रही ऐ मेरी जिंदगी जिंदगी ने कहा जिंदगी की कसम जिंदगी के बिना ना रही जिंदगी।   कवि और लेखक: […]