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वाचिक परम्परा की प्रासंगिकता: कथा-कहन का परिप्रेक्ष्य-प्रो. मृदुला शुक्ल

October 7th, 2021

वाचिक परम्परा की प्रासंगिकता: कथा-कहन का परिप्रेक्ष्य प्रो. मृदुला शुक्ल अध्यक्ष, हिन्दी विभाग एवं अधिष्ठाता, कला संकाय इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) यह सत्य है कि देश-दुनिया में आधुनिकता आने के साथ ही मुद्रण-यन्त्र आये। पत्र-पत्रिकाएँ छपने लगीं और पुस्तकें भी। हमारे यहाँ जो भी शिक्षण गुरुकुलों में अथवा घर-परिवार में बुजुर्गों द्वारा मौखिक […]