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मध्यकाल की स्त्री रचनाकारों से जुड़ी जनश्रुतियाँ

September 29th, 2021

मध्यकाल की स्त्री रचनाकारों से जुड़ी जनश्रुतियाँ पीएच।डी। शोधार्थी, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली, फ़ोन न। 8447782321, ईमेल: jyotijprasad@gmail।com शोध लेख सारांश– प्रस्तुत शोध लेख में मध्यकालीन समय में प्रसिद्ध दो कवयित्रियों के साथ जुड़ी जनश्रुतियों का ज़िक्र किया गया है। इन श्रुतियों ने समय के साथ लोकस्मृति में अपना स्थान बदलते स्वरुप के साथ […]

स्त्री-अस्मिता का सैद्धान्तिक पक्ष

September 29th, 2021

स्त्री-अस्मिता का सैद्धान्तिक पक्ष डा॰ शर्वेश पाण्डे एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग डी॰ सी॰ एस॰ के॰ पी॰ जी॰ कालेज, मऊ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उ॰ प्र॰ पूनम ठाकुर शोधार्थी हिन्दी डी॰ सी॰ एस॰ के॰ पी॰ जी॰ कालेज, मऊ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उ॰ प्र॰ अस्मिता, मनुष्यता के विकासक्रम में मानवीय भूमिका को […]

people watching concert during nighttime

भारतीय रंगमंच में स्त्रियों का प्रवेश-स्वाति मौर्या

March 14th, 2021

रंगमंच के इतिहास को देखने पर यही मिलता है कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल के शुरुआती कुछ वर्षों तक स्त्रियों की भूमिका भी स्वयं पुरुष ही करते थे। जबकि भारत देश में हमेशा से ही विदुषी महिलाएं होती रही हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही थी। लेकिन यह विचारणीय प्रश्न है कि इतनी उन्नति परम्परा के रहते हुए भी रंगमंच में स्त्रियों की भूमिका पुरुष ही क्यों करते थे ? वैदिक काल से ही प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली स्त्रियों को मंचन के क्षेत्र में प्रवेश मिलने में इतना संघर्ष क्यों करना पड़ा ?

silhouette of persons hand

इक्कीसवीं सदी की हिंदी कहानियों में स्त्री की बदलती सामाजिक छवि

March 6th, 2021

वर्तमान हिंदी कहानी स्त्री के सशक्त होते तमाम रूपों को उद्घाटित करती है जिनका अध्ययन करने से स्वतः सिद्ध हो जाता है कि- स्त्री अब स्वयं को अबला नहीं सबला के रूप में स्थापित करती है। वे अपनी अन्तः-बाह्य स्थितियों पर चिंतन-मनन करती हुई अपने लिए एक नयी राह के अन्वेषण में लगी है।